धान की उन्नत खेती

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dhan (paddy)
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धान की उन्नत खेती

धान के लिए खेत की तैयारी

  • गर्मी में समय मिलने पर खेत की एक बार अच्छी तरह से जुताई करले तथा गोबर अथवा कम्पोस्ट खाद 20 से 25 गाड़ी प्रति हैक्टेयर खेतो में डाल लें । इससे खेतो की उर्वरा शक्ति बरक़रार रहती है |
  • अगर खेतों में सन की हरी खाद की फसल लगाई गई हो तो उन खेतों में रोपा लगाने के 15 दिन पहले सन की फसल को जुताई ( 6 inch. की गहराई तक) कर ले और इसे मिट्टी में सड़ने के लिये छोड़ दें, क्योंकि हरी खाद द्वारा स्थाई रूप से मिट्टी की उर्वराशक्ति को बढ़ा सकते है।
  • रोपा लगाने से पहले खेत की अच्छी तरह से मचाई कर लें, पाटा चलाने के पहले P.S.B कल्चर 500 gm मात्रा को 100 Kg गोबर की भुरभुरी खाद में अच्छी तरह मिलाकर प्रति हैक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करें तथा नत्रजन की आधी मात्रा, स्फुर एवं पोटाश की पूरी मात्रा छिड़क कर मिट्टी में मिला दें।

 

धान की रोपाई

धान की रोपाई पर ध्यान देने योग्य बाते

  • धान की रोपाई के लिए पौध उखाड़ने से 1 दिन पहले नर्सरी के खेत में पानी चला दे ताकि जमीं पर नमी बनी रहे और पौध उखाड़ते समय ध्यान दे की पौधों कि जड़ों को धोते समय नुकसान न होने दे तथा पौधों को काफी निचे से पकड़कर उखाड़े |
  • धान की रोपाई में पौधे की उम्र सामान्यत : 25 – 30 दिन पुराना हो तथा पौधे में 5 – 6 पत्तियां निकल जाए तो यह रोपाई के सही होता है, और यदि पौधे की उम्र ज्यादा होगी तो पौधे में कल्ले कम फूटते है जिससे उपज में कमी आती है|
  • रोपाई करने से पहले खेत को अच्छी तरह से समतल कर के मेंड़ बना ले,
    धान की फसल को खाद्यान फसल में सबसे अधिक पानी की आवस्य्क्ता होती है, धन को रोपाई के एक सप्ताह बाद कल्ले बनते समय, बाल निकलते समय, फूल बनते समय, और दाना बनते समय खेतो में पानी अति आवश्यक है|
  • परिक्षण के आधार पर यह पाया गया है की धन की फसल अच्छी उपज लेने के लिए लगातार पानी भरा रहना आवश्यक नहीं है, बल्कि इसके लिए खेतो में से सतह पर से एक बार पानी निकल लेना चाहिए, और इसके 2 दिनों बाद उसमे 5 से 7 सेंटीमीटर पानी वापस से भर देना चाहिए |
  • यदि वर्षा की कमी के कारण फसलों में पानी की कमी दिखाई दे, तो सिचाई अवश्य करे | खेत में पानी रहने से फास्फोरस, मैगनीज , और लोहा तत्वों की उपलब्धता बड़ जाती है, साथ ही हमरे खेत में जो विभिन्न प्रकार के खरपतवार होते है वो भी अधिक पानी की अवस्था में नहीं उग पाते है |

 

धान के खेत में दवा का छिड़काव

धान की फसल के रोग, किट एवं उनका नियंत्रण

ब्लास्ट (Blast) या झोंका रोग

blast on paddy

ब्लास्ट (Blast) या झोंका रोग

यह रोग सफ़ेद फफूंद से फैलता है और पौधे के सभी भाग इस बीमारी से प्रभावित होते है वृद्धि अवस्था में यह रोग पत्तियों पर धब्बे के रूप में दिखाई देता है इनके धब्बों के किनारे कत्थई रंग के तथा बिच वाला भाग रख के रंग का होता है रोग को तेजी से आक्रमण होने वाली का आधार भी ग्रसित भी हो जाता है फलस्वरूप वाली आधार से मुड़कर लटक जाती है : फलत दाने का भराव भी पूरा नहीं हो पाता है |

paddy

धान की कटाई

धान में बालियाँ निकलने के लगभग 1 माह बाद सभी किस्मे की धान पक जाती है, कटाई के लिए 80% बालियों में दाने पक जाने पर और उनमे नमी 20% जब हो वह उस समय धान कटाई के लिए उपयुक्त होता है, कटाई दरांती से जमीन कि सतह पर व ऊपर कि भूमियों में निचे कि सतह से 15-20 से.मी. ऊपर से करनी चाहिए मड़ाई : साधारणत हाथ से पीटकर कि जाती है शक्ति चालित थ्रेशर का उपयोग भी बड़े किसान मड़ाई के लिए करते है कम्बाइन के द्वारा मड़ाई और कटाई का कार्य एक साथ हो जाता है मड़ाई के बाद दानो कि सफाई कर लेते है सफाई के बाद धान के दानों को अच्छी तरह सुखाकर ही भण्डारण करना चाहिए, भण्डारण से पूर्व दानों को 12% नमी तक सुखा लेते है .