Wednesday, December 7, 2022
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फसलों की बीमारी

हल्दी की खेती कैसे होती है हल्दी की खेती की...

मसाले एवं रंग के रूप में कम आने के अलावा औषधि के रूप में भी इसका अत्यधिक महत्व है सुखी एवं कच्ची हल्दी को त्वचा के रोगों तथा कटे हुए भागो पर लगाने के लिए प्रयोग किया जाता है भीतरी रोगों के लिए यह एक उत्तेजक एवं सुगन्धित टोनिक का कार्य करता है हिंदुवो में हल्दी का उपयोग धार्मिक अवसरों में भी किया जाता है यह पायरिया नाशक नेत्ररोग चर्मरोग नाशक रक्त शोधक पेट दर्द निवारक होने के साथ साथ अन्य कई रोगों में एंटीसेप्टिक के रूप में इसका उपयोग होता है वर्तमान में इससे अनेक औषिधिय तेल मलहम तथा अनेक आयुर्वेदिक तथा होम्योपैथिक दवाओं का निर्माण होता है गांठो में पीला रंग उसमे पाए जाने वाले रसायन करक्यूमिन के कारण होता है भारत में हल्दी की खेती मुख्यता महारास्ट कर्नाटक असम मध्यप्रदेश बिहार उदिशा आँध्रप्रदेश तथा तमिलनाडु में किया जाता है हल्दी का मूलस्थान भारत ही मन जाता है  हल्दी की खेती के लिए उपयुक्त किस्मे - varieties for turmeric farming in hindi-

चुणिक Powdery Mildew

चुणिक Powdery Mildew नुकसान की प्रवृति एवं निशान : पत्तियों की सतह पर ,पर्णवृंत तथा तने पर सफेद पाउडर जैसे कवक का विकास दिखाई देता...

जडविलगन Root Rot

जडविलगन Root Rot नुकसान की प्रवृति एवं निशान : प्रभावित पत्तिया पिले रंग में परिवर्तित हो जाती है तथा भूरे रंग के अनियमित धब्बे पत्तियों...

फ्यूजेरियम Fusarium Wilt

फ्यूजेरियम Fusarium Wilt   नुकसान की प्रवृति एवं निशान : क्लोरोशिस ,परिगलन ,परिपक्वता से पूर्व पत्तियों का गिरना ,परोह तंत्र का भूरा होना तथा विकास का...