बैंगन की कीट और बीमारियां – Brinjal Pests & Diseases in hindi

138

बैंगन का तना एवं फल छेदक में लगने वाले कीट Brinjal Shoot & Fruit Borer

नुकसान की प्रवृति एवं निशान :

  • इल्ली तने में छिद्र कर आंतरिक ऊतकों को खाती है ।
  • जब संक्रमण सीमांत शाखाओं पर होता तो वह मुड़कर झुक जाती है ।
  • इल्ली फलो पर बाह्यदल पुंज की कोमल अवस्था में उसके नीचे से प्रवेश कर आक्रमण करती है तथा कोई भी संक्रमण के चिन्ह दिखाई नहीं देते है |
  • फलो पर दिखाई देने वाले बड़े छिद्र सामान्यत: इल्ली के निकास या बहार आने के होते है |

उपचार :

  1.  Interprid 30 ml
  2.  Regent 45 ml
  3.  Larvin 30ml /pump

बैगन और मिर्च मिड्ज मक्खी Brinjal & Chilli Midge Fly 

नुकसान की प्रवृति एवं निशान :

  • मैगत कलियों और फूलो में छिद्र कर देती है |
  • यह विकसित हो रहे बीज तथा अण्डाशय पर भोजन करती तथा घाव का विकास करती है |
  • कलिया पकने या खिलने से पूर्व ही गिर जाती है |

उपचार :

इनमे से किसी एक का छिड़काव करे |

  1. Interprid 30 ml /pump
  2. Acephate 40 gm /pump
  3. Regent 45 ml/ pump
  4. Fame 5 ml/ pump
  5. Larvin 30 ml/pump

 

बैंगन का फोमोसिस अंगमारी Brinjal Phomosis Blight

नुकसान की प्रवृति एवं निशान :

  • यह बीजांकूर व प्रतिरोपित दोनों अवस्था में दिखाई पड़ती है |
  • छोटे गोल आकर के धब्बे पत्तियों पर दिखाई पड़ती है |
  • इसमें पहले धूसर रंग का परिवर्तन तथा बाद में इसका केंद्र हलके रंग में परिवर्तित हो जाता है |
  • पीले से हलके भूरे रंग का धब्बे पुराने फलों पर दिखाई देता है |
  • प्रत्येक धब्बे फेलता जाता है तथा फल के अधिकांश भागो या पूरे फल पर फैलता जाता है |

उपचार :

  1. बीजोपचार कार्बेन्डाजिम के साथ करे |
  2. कम से कम तीन वर्षो का फसल चक्र, किसी भी एक गैरमेजबान फसल के साथ करे | रेड्रोमिल अथवा हेडलाइन का छिड़काव करे |

 

बैंगन का छोटा पत्ती रोग  Little Leaf of Brinjal

नुकसान की प्रवृति एवं निशान :

  • पत्तियों के आकार में कमी |
  • पर्णवृन्त और गांठो की दूरियां कम हो जाती है |
  • शाखाओं और पौधों की सामान्य से अधिक वृद्धि होती है |
  • पत्तेदार संरचना में पर्णीय भागों के बदलाव होने से पौधे जंगली दिखाई देते हैं| फल यदा कदा दिखते हैं |

उपचार :

  1. संक्रमित पौधों को बाहर निकालकर नष्ट कर देना चाहिए |
  2. एमाइडाइक्लोराइड (email diklorida) अथवा थाइमिथोकसन (thiamethoxam) का छिड़काव करना चाहिए |