मेथी की खेती कैसे की जाती है, मेथी की खेति कैसे करे- मेथी की खेती करने की पूरी जानकारी -methi or fenugreek farming in hindi –

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methi मेथी का botanical name क्या है-मेथी का botanical name -Trigonella foenumgraceum होता है.

मेथी किस family का है -leguminoceae

मेथी, पत्तियों तथा बीज के लिए उगाई जाती है पत्तियां सब्जी के रूप में और बीज मसालों के रूप में  उपयोग किये जाते है बीज कडवा होता है कडुवापन foetid जो की कडुवा तेल है , के कारणहोता है यूरोप उत्पत्ति स्थान है मेथी की पत्त्तियों में प्रोटीन कैल्सियम फास्फोरस , आयरन तथा विटामिन A तथा सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है इसलिए मेथी की भाजी को अत्यंत ही गुणकारी माना जाता है और इसकी तुलना Cod liver oil से  की जा सकती है बीज बोने के 30 दिन बाद काटने योग्य पत्तियां तैयार हो जाती है 30,45,60 दि न में कटाई की जाती है बीज 130- 135 दिन में तैयार हो जाता है उपज प्रति हेक्टेयर पत्तियां 90- 100 क्विंटल बीज 12 – 15 क्विंटल तथा मिश्रित पत्तियां और बीज 7 -9 क्विंटल तथा 6-6 क्विंटल होती है 

मेथी की उन्नत किस्मे कौन कौन सी होती है -improved varieties for fenugreek farming in hindi-

1. पूसा early bunching –

विपुल उत्पादक , सीधे तने वाले तथा अधिक फैलने वाली किस्म है ऊँचाई 50 – 70 सेमी होती है बन्चिंग् के लिए उपयुक्त होती है 

2. पूसा कसूरी –

विपुल उत्पादक देर से फूलने वाली तथा अधिक संख्या में कटाई देने वाली किस्म है , पत्तियों में विशेष गंध होती है 

मेथी की अन्य नवीनतम किस्मे –

टाईप – 226, सी. एस .- 960 , लेमसेलेक्शन हिसार सोनाली एच . एम.-57

मेथी की सफल खेती के लिए आवश्यक बाते -Important points for improved fenugreek cultivation –

1.मेथी की खेती के लिए जलवायु कैसी होनी  चाहिए- suitable climate for fenugreek farming- मेथी की खेती के लिए भूमि कैसी हो-मेथी की फसल में सिंचाई कब की जाती है –

मेथी शीत चाहने वाली सब्जी है , किन्तु पाले से हानि होती है मेथी सभी प्रकार की भूमि में उगाई जा सकती है , किन्तु जल निकास आवश्यक है सिंचाई 10 – 15 दिन के अंतर से कुल 6 सिंचाई की आवश्यकता होती है 

2. मेथी की खेती के समय कौन कौन से खाद एवं  उर्वरक डालने चाहिए -manure and fertilizers for fenugreek farming-

50-100 क्विंटल गोबर की खाद या कम्पोस्ट खेत की तयारी के समय दे बीज के लिए सिंचित nitrogen 40 kg ,स्फुर 30 किलो , पोटाश 15 किलो प्रति हेक्टेयर 

3.बीज की दर कितनी होनी चाहिए –

असिंचित nitrogen 10 kilo , स्फुर 10 किलो , पोटाश 5 किलो प्रति हेक्टेयर 

4. पत्तियां और बीज –

सिंचित nitrogen 30 kg , स्फुर 30 किलो , पोटाश 15 किलो प्रति हेक्टेयर ,nitrogen मात्रा तीन भागो में बाटकरक्रमशः बोने के 30 , 45,60 दिन बाद दे 

5. मेथी के बीज को बोने का समय क्या होता है –

sowing time of fenugreek farming-

देशी बीजो के लिए – अक्टूबर से नवम्बर बीज के लिए , पत्तियों के लिए – 15 सितम्बर से 15 मार्च , कसूरी – नवम्बर से 15 दिसंबर बीज तथा पत्तियों के लिए 

6. मेथी को बोने के लिए बीजो की मात्रा क्या होनी  चाहिए- seed quantity for fenugreek farming in hindi-

प्रति हेक्टेयर बीज की मात्रा – देशी – 30-35 किलो , कसूरी – 23-27  किलो होनी चाहिए  

7. मेथी के बीजो का उपचार कैसे करना चाहिए – seed treatment in fenugreek farming –

थीरम 2 / 0.5 ग्राम प्रति किलो बीज उपचारित किया जाता है 

8. मेथी के बीजो को कितने कितने दूरी में लगाना  चाहिए -difference between seeds infenugreek farming-

कतार 25 सेमी , बीज 10-15 सेमी या छिड़ककर बीज को 1.5 से 2 सेमी गहरी बोई जानी चाहिए बोने के बाद मेथी के बीजो को मिटटी से अच्छी तरह ढंक दे मेथी के बीजो में अकुरण 5 – 7 दिनों में होता है 

9. मेथी के पत्तियों की कटाई कब करनी चाहिए –

पत्तियां जब पूर्ण विकसित हो जाये तब काट लेना चाहिए पत्तियां कटते समय यह ध्यान रखे की पौधो को हानि न पहुचने पाए 

10. मेथी के पौधे में लगने वाले रोग कौन कौन से है इन रोगों से रोकथाम कैसे की जाये -diseases and its preservation in fenugreek farming-

मेथी में पर्ण दाग , रोग लग जाते है ये रोग सर्कोस्पोरा बेटिकोल नामक फफूंद केकारण फैलता है इस रोग के कारण पत्तियों पर भूरे धब्बे बनते है इन रोगों से  रोकथाम – 1. बोने से पूर्व थायरम द्वारा 0.25 % की दर से बीज को उपचारित करना चाहिए 

2. daiethen M.- 45 की 2.5 किलोग्राम मात्रा को 1000 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से फसल पर छिडकाव करना चाहिए 

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